Tuesday, 19 May 2020

केदारनाथ कैसे जाएं? केदारनाथ का महत्व एवं केदारनाथ के 10 अद्भुत रहस्य, How to reach Kedarnath Importance of Kedarnath and 10 amazing secrets of Kedarnath

केदारनाथ कैसे जाएं?
केदारनाथ का महत्व एवं केदारनाथ के 10 अद्भुत रहस्य 
How to reach Kedarnath
Importance of Kedarnath and 10 amazing secrets of Kedarnath
Kedarnath

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How to reach Kedarnath in hindi 
दोस्तों नमस्कार आज हम बात कर रहे है बाबा केदार की जी है, बाबा केदारनाथ भारत का प्रमुख धाम है जो भोले नाथ का निवास स्थान माना जाता है। हम आपको बताएंगे कि कैसे जाएं केदारनाथ, या कौन से मार्ग से जाएं केदारनाथ। How to reach Kedarnath in hindi 
भारत एक तीर्थ स्थल है जहाँ कयी देवी देवता निवास करते है, उसमे एक छोटा सा राज्य है उत्तराखंड जो पहले उत्तराँचल के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ पर इस राज्य के अपने चार प्रमुख धाम है, जिनमे बाबा केदार की अलग ही महिमा है। How to reach Kedarnath in hindi 

आपको हम केदारनाथ की दूरी के बारे मे अवगत करा रहे है--
केदारनाथ से प्रमुख शहरों की दूरी--

(1) ऋषिकेश से केदारनाथ 223 कि.मी

(2) दिल्ली से केदारनाथ 458 कि.मी

(3) कानपुर से केदारनाथ 492 कि.मी

(4) नागपुर से केदारनाथ 1421 कि.मी

(5) बंगलोर से केदारनाथ 2484 कि.मी

(6) लखनऊ से केदारनाथ 469 कि.मी

(7) कलकत्ता से केदारनाथ 1,293कि.मी

(8) मुंबई से केदारनाथ 11,437 कि.मी

(9) चेन्नई से केदारनाथ 1,965 कि.मी

आप भारत के किसी भी शहर से क्यों न हो केदारनाथ की वास्तविक यात्रा सही मायने में हरिद्वार या ऋषिकेश से आरंभ होती है। हरिद्वार तीर्थं नगरी भी मानी गयी है यहाँ पर श्रद्धालु स्नान करके जल भल कर यात्रा प्रारंभ करते है। हरिद्वार एक ऐसा शहर है जहाँ  देश के सभी बड़े और प्रमुख शहरो से रेल द्वारा जुड़ा हुआ है। और सडक मार्ग से भी जुड सकते है। हरिद्वार तक आप ट्रेन से आ सकते है। इसके आगे पूरा पहाडी मार्ग है जहाँ ट्रेन नही जाती है। यहाँ से आगे जाने के लिए आप चाहे तो टैक्सी बुक कर सकते हैं या बस से भी जा सकते हैं। और यहाँ से हेलीकाप्टर की व्यवस्था भी है, और सुन्दर प्रकृति का मनोरम दृश्य का अवलोकन करते हुए और स्वर्ग का अनुभव करते हुए बाबा केदार के दर्शन कर सकते है।

हरिद्वार से आपको सोनप्रयाग जाना होगा जो कि (235 किलोमाटर) दूर है, रास्ते मे आपको होटल,ढाबे,रेस्तरां आदी सब कुछ मिल जाएगा, और सोनप्रयाग से गौरीकुंड 5 किलोमाटर आप सड़क मार्ग से किसी भी प्रकार की गाड़ी से जा सकते है। यहाँ आप आराम करके सकते है क्योंकि इसके आगे आपको पैदल ही चलना है, यहां से आगे सडक मार्ग नहीँ है।

बाबा केदार आसानी से नहीं मिलने वाले क्योंकि असली भक्ति तो आपको अब करनी होगी क्योंकि इससे आगे का 16 किलोमाटर का रास्ता आपको पैदल ही चलना होगा या आप पालकी या घोड़े से भी जा सकते हैं। रास्ता भी बहुत बहुत संभल कर चलने वाला है। क्योंकि यहाँ आठ महीने तक बर्फ से ढका रहता है, इसलिए रास्ता फिसलन भरा है, हरिद्वार या ऋषिकेश में से आप जहाँ से भी यात्रा आरम्भ करें गौरीकुंड तक पहुँचने में 2 दिन लें। आप रात्रि विश्राम श्रीनगर (गढ़वाल) या रुद्रप्रयाग में करें और अगले दिन गौरीकुंड जाएं। आपकी यात्रा अवस्य ही सुखमय होगी और आप वास्तव में प्रकृति को जो धरोहर है उसका आनन्द ले सकोगे।

केदारनाथ के 10 रहस्यमय बातें
10 mysterious things about Kedarnath

दोस्तों केदारनाथ में अनेकों रहस्य छुपे हुए है, जो कुछ रहस्य हम आपके सामने बयां कर रहे है---

(1) वाडिया संस्थान के शोध में केदारनाथ धाम को लेकर एक बड़ा खुलासा 5 से 6 हजार साल पहले यहाँ धान की फसल होती थी। 

(2) केदारनाथ की जिस गुफा में नरेंद्र मोदी ने साधना की वह गुफा करी 12250 फीट ऊंची है। और इसमें  सभी सुख सुविधाएं है।

(3) कयी साल पहले केदारनाथ में चौड़ी पत्तियों वाली वनस्पतियों का बहुत बडा व घना जंगल भी था। 

(4) केदारनाथ के आस-पास कयी रहस्यमय गुफाएं है,जिसमें कयी साधु संत साधना में लीन रहते है।

(5) केदारनाथ धाम में एक तरफ करीब 22 हजार फुट ऊंचा केदार, दूसरी तरफ 21 हजार 600 फुट ऊंचा खर्चकुंड और तीसरी तरफ 22 हजार 700 फुट ऊंचा भरतकुंड का ए तीन रहस्यमय पहाड़ है।

(6) केदारनाथ का सबसे बडा रहस्य यह है कि यहाँ छः महीने अधिक बर्फ के कारण मंदिर ढका रहता है और कपाट खुलने के बाद भी मंदिर में दीया (जोती) जलती रहती है।

(7) केदारनाथ में एक रहस्यमय गौरीकुण्ड भी है जिसमें पानी उभलता रहता है, लेकिन दैवीय शक्ति के कारण उसमें हाथ डालने पर जलन नही होती लेकिन लोग उसमें चावल उभालते है।

(8) केदारनाथ में 5 नदियों का संगम भी है यहां- मं‍दाकिनी, मधुगंगा, क्षीरगंगा, सरस्वती और स्वर्णगौरी। इन नदियों में अलकनंदा की सहायक मंदाकिनी आज भी मौजूद है। इसी के किनारे है केदारेश्वर धाम। 

(9) 8 हजार साल के केदारनाथ का मौसम इतना विपरीत था कि जहां आज जून में भी सर्दी लगती है वहां पर बेहद गर्मी होती थी।

(10) यहां सर्दियों में भारी बर्फ और बारिश में जबरदस्त पानी रहता है,जिसके कारण यहाँ आना एक दम प्रतिबन्ध है।

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