Thursday, 3 August 2023

Poem On Bharat Mata In Hindi भारत माता पर कविता bharat maata par Desh Bhakti Geet Kavita Shlogan suvichar भारत माँ की सेवा सच्ची सेवा

Poem On Bharat Mata In Hindi भारत माता पर कविता  bharat maata par Desh Bhakti Geet भारत माँ की सेवा सच्ची सेवा


हे भारत माता नमन तुम्हें,   हम गीत तुम्हारे गाते है ।
रहे सलामत वतन मेरा, नित शीश तुम्हें झुकाते है ।
हम है उस देस के वासी, जहां की मिट्टी सोना उगलती है ।
आच्छादित स्वर्ण सुमेरू है, जहां  गंगा की निर्मल धारा है ।


पश्चिम में कच्छ विशाल खडा,पूरब में मेघ की गागर है ।
उत्तर में केसर की खुशबू है,दक्षिण में सागर हिन्द अडा ।
बाईबिल,गीता,कुरान,गुरुग्रंथ में भाव सिखाता एकता का ।
संस्कार, सभ्यता उदय हुई जहाँ  वो भारत माता अपनी है ।


परहित में भी अपना हित है मानवता हम दिखलाते है ।
मानव गौरव हो जिसमें हम आदर्शों के शिखर सजाते है ।
नारी के रूप को भजते है देवी-मां वो कहलाती है ।
नारी नव दुर्गा का रूप है,सभ्य संस्कारों की जननी है ।


प्रकृति के विपरीत चले ना,दिशाएं यहाँ पूजी जाती है ।
यहाँ की वसुधा में एक प्राण है एक ब्रह्म सब जीवों में ।
जहाँ का बेटा पित्र आज्ञा पर जीवन वन में बिताता है ।
जहाँ की नारी पती को पूजे सती सावित्री कहलाती है।


कबीर,रमीम,रसखान ने मिलकर जाती-पांति दूर किया ।
वेदव्यास,तुलसी, गणेश ने धर्म ग्रंथों का सार दिया ।
विवेकानंद के भाषण से जब विदेशी भी कायल हुए ।
ज्ञान-विज्ञान, यान, यन्त्रों में भारत का जग में मान बढा ।


कैलाश हिमालय चोटी पर शिव शंकर का त्रिशूल खडा ।
वहीं नीचे घाटियों में फूलों से है मां का आंचल सजा ।
भारत के गौरव की गाथा मैं किन शब्दों में बयां करूँ ।
चारों वेद, पुराण, ग्रंथ में छिपा जगत का ज्ञान है ।

धर्म-मजहब भेद मिटाकर हम एक कुटुम्ब की शाखा है ।
व्रत-उत्सव, त्यौहार मनाते सब भाई-बहन का नाता है ।
यहाँ की नारी में वो शक्ति जो,यमराज से लोहा लेती है ।
बात आए स्वाभिमान पे गर तो प्राण दाह कर देती है ।


भगीरथ तपस्या से गंगा भारत को अनुप उपहार मिला 
तार दिया जग को सारा सब पुरखों का उद्धार किया ।
इस धरती पर गोविंद से पहले गुरू को पूजा जाता है ।
मधुर नाता है शिष्य-गुरू का समरसता सिखलाता है ।


जहाँ मित्रता भगवान भी इन्सानो से ऊपर करते है ।
धोके चरण जब सुदामा जी के अश्रु से मोते झरते है ।
विद्या देना इस धरती पर महादान कहलाता है ।
लेने-देने वाले दोनों का भाग्य-कमल खिल जाता है ।

यज्ञ-धूम और शंखनाद कण-कण में शोधन करते है ।
उस भारत में नित्य सुबह वेद मंत्रों से घर गूंजा करते है ।
गौ-गंगा-गीता-धरती से हम सबका मां का नाता है ।
भाव अमृत भर देता है सब क्लेष-द्वंद्व मिट जाता है ।


सद्गुणों को माता जीजाबाई बालक में पिरोया करती थी ।
ममता अपनी बरसाती थी पर ढील कभी न देती थी ।
राजा हरीशचंद्र जैसे दानी ना पूरे जग में और मिले ।
सपने में देकर राज-पाट फिर दर दर को वो भटकते थे ।

इस भारत को जग सारा क्यों सोने की चिड़िया कहता है ।
दया-प्रेम-करूणा-ममता समरसता भाव छलकता है ।
मानी-दानी और स्वाभिमानी हर वर्ग यहाँ कहलाता है ।
रूखी-सूखी जो भी मिले बस नाम प्रभु का गाता है।

वीर-प्रसूता जिस धरती पर दुष्ट शत्रु भय खाते है ।
मां के वीर सपूतों के सम्मुख आंख मिला नहीं पाते है ।
भले नहीं हम कूट-नीति में जग के आगे कभी पडे ।
दिया सहारा जग को तब जब काल का साया घना पडा ।

इस धरती पर वैद्यराज को भगवान सा दर्जा मिलता है ।
रोगी-सेवा पुण्य समझकर लहू-दान वो करते है ।
जिस धरती पर वन-बाग-नदी और पर्वत पूजे जाते है ।
उस धरती के दर्शन को तब देव भी दौडे आते है ।

यहाँ की संस्कृत भाषा देव की नित अमृत पान कराती है ।
द्वेष मिटा देती उर के और सदाचार सिखलाती है ।
बुरे कर्म को पाप समझकर हम गलत राह पर नहीं चलते ।
राह दिखाते उस पथिक को जो मानवता को भूल चले ।

मोक्ष-प्राप्ति और मुक्ति-दान तू ही अन्नपूर्णा कहलाती है ।
इसीलिए भारत-माता का गुण-गान सब गाते है ।
मातृभूमि का ऋणी स्वयं को कहते सभी निवासी है ।
राष्ट्र हेतु जीते-मरते तन-मन-धन सब सब अर्पित करते ।

वंदेमातरम्      वंदेमातरम्
वंदेमातरम्      वंदेमातरम्
भारत माता की जय

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