Monday, 23 March 2020

संस्कृत में (40) शिक्षाप्रद महत्वपूर्ण सूक्तियां अर्थ सहित In Sanskrit (40) instructive important Suktyas with meaning

संस्कृत में (40) शिक्षाप्रद महत्वपूर्ण सूक्तियां अर्थ सहित 
In Sanskrit (40) instructive important Suktyas with meaning


दोस्तों जीवन हर कोई सफलता पाना चाहता है। Best life Quotes in sanskrit,Hindi और उस जीवन को सफलता के रास्ते पर ले जाने वाले प्रेरक अनमोल विचार,जीवन पर सुविचार, जीवन पर श्लोगन, जीवन के उपयोगी विचार, नैतिक विचार आदी कयी ऐसे माध्यम है,जिससे हम जीवन यानि जिसे Success के तराजू से मापा जाता है,Life Quotes in sanskrit Hindi  व्यक्ति जितना अधिक सफल होता है उसे उतना ही बेस्ट माना जाता है। परीक्षा कोई भी हो श्रेष्ठ अंक प्राप्त करने के लिए हम यहां संस्कृत तथा हिन्दी की शिक्षाप्रद महत्वपूर्ण सूक्तियां लेकर आए है ,Success Quotes in sanskrit,Hindi इसलिए जीवन में आगे बढ़ने के लिए Success का होना बहुत जरुरी है।Hindi Quotes ,संस्कृत सुभाषितानीसफलता के सूत्र, गायत्री मंत्र का अर्थ आदि शेयर कर रहा हूँ । जो आपको जीवन जीने, समझने और Life में अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्व पूर्ण भूमिका निभाते है,आध्यात्म ज्ञान से सम्बंधित गरूडपुराण के श्लोक,हनुमान चालीसा का अर्थ ,ॐध्वनि, आदि

Great Inspirational and Motivational Quotes about life हमारा मकसद यही है कि हम सबको सही राह दिखा सकें,इसके साथ-साथ और भी कई प्रकार के Hindi Quotes संस्कृत के श्लोकों का भावार्थ gyansadhna.com लिखे गये है।


१- गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।।  
अर्थात-  गुरु , ब्रह्मा , विष्णु और महेश देवता के समान ही सम्माननीय हैं ।

२- सर्वे सन्तु निरामयाः।। 
अर्थात- सब नीरोग हों । 

३- उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः ।। 
अर्थात- कार्य परिश्रम करने से पूर्ण होता है , मनोरथ करने से नहीं । 

 ४-  दैवेन देयमिति कापुरुषा वदन्ति ।।
अर्थात-  भाग्य के भरोसे कायर पुरुष रहते हैं । 

५- यत्ने कृते यदि न सिध्यति कोऽत्र दोषः ।। 
अर्थात-  यदि प्रयत्न करने पर भी सफलता न मिले ता देखना चाहिए कि दोष कहाँ है ? 

६- नहि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते ।।
अर्थात- ज्ञान के समान इस संसार में और कुछ पवित्र नही 

७- भोगो भूषयते धनम् ।।
अर्थात- धन की शोभा उसका उपभोग करने से है । 

८- सम्पूर्णकुम्भो न करोति शब्दम् ।।
अर्थात- भरा हुआ घड़ा नहीं छलकता । 

९- विद्या धर्मेण शोभते ।।
अर्थात-- विद्या धर्म से शोभा पाती है । ।

१०- सन्तोष एव पुरुषस्य परमनिधानम् ।।
अर्थात- सन्तोष मनुष्य का सबसे बड़ा धन है ।

११- यस्तु क्रियावान् पुरुषः स एव ।।
अर्थात- जो क्रियाशील है , वही पुरुष है । 

१२- मातृवत् परदारेषु ।।
अर्थात- दूसरे की स्त्री माता के समान है । 

१३- जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ।।
अर्थात- जननी तथा जन्मभूमि स्वर्ग से भी बड़ी होती हैं या ' जननी जन्मभूमि स्वर्ग से महान् ' है । 

१४- उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ।।
अर्थात- उदार चरित्रवाले के लिए संसार ही परिवार है ।

१५- अगच्छन् वैनतेयोऽपि पदमेकं न गच्छति ।।
अर्थात- बिना परिश्रम शक्तिमान् भी कुछ नहीं कर सकता । 

१६- शीलं हि सर्वनरस्य भूषणम् ।।
 अर्थात- मनुष्य की शोभा शील ही है । 

१७- बुभुक्षितः किं न करोति पापम् ।। 
अर्थात- भूखा क्या पाप नहीं कर सकता 

१८- शठे शाठ्यं समाचरेत् ।।
अर्थात- दुष्ट के साथ दुष्टता का व्यवहार करना चाहिए । 

१९-  शरीरमाद्यं खलु धर्म साधनम् ।। 
अर्थात- शरीर ही धर्म का सबसे पहला साधन है । 

२०-  आचारहीनं न पुनन्ति वेदाः ।।
अर्थात- दुराचारी को वेद भी पवित्र नहीं करते । 

२१- अहिंसा परमो धर्मः ।।
अर्थात- अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है । 

२२- सुलभा रम्यता लोके दुर्लभो हि गुणार्जनम् ।।
अर्थात- संसार में सुन्दरता तो सरलता से मिल जाती है , किन्तु गुण - ग्रहण करना कठिन है ।

२३- महाजनो येन गतः स पन्थाः ।।
अर्थात- महापुरुष जिस मार्ग से जाएँ , वही श्रेष्ठ मार्ग है ।

२४- आत्मज्ञानं परमज्ञान ।।
अर्थात- अपने को पहचानना ही सबसे बड़ा ज्ञान है । 

२५-  ज्ञानमेव परमो धर्मः ।।
अर्थात- ज्ञान ही सबसे बड़ा धर्म है । 

२६-  स्वाध्यायान्मा प्रमदः ।। 
अर्थात- स्वाध्याय में आलस्य मत करो । 

२७- अति सर्वत्र वर्जयेत ।।
अर्थात- किसी भी प्रकार की अति का परित्याग कर देना चाहिए । 

२८- मा ब्रूहि दीनं वचः ।।
अर्थात- दीन वचन मत बोलो । 

२९- मानो हि महतां धनम् ।।
अर्थात- मान ही पुरुषों का धन है ।।

३०- वीरभोग्या वसुन्धरा ।।
अर्थात-  वीर ही पृथ्वी का उपभोग करते हैं । 

३१-  वचने का दरिद्रता ।।
अर्थात-  मधुर बोलने में क्या गरीबी ।

३२-  नास्ति क्रोधसमो रिपुः ।।
अर्थात- क्रोध के समान कोई शत्रु नहीं । 

३३- शत्रोरपि गुणा वाच्याः ।।
अर्थात- शत्रु के भी गुणों को कहना चाहिए । 

३४-  गतस्य शोचनं नास्ति ।।
अर्थात-  बीती ताहि बिसार दे ।

 ३५- विनाशकाले विपरीत बुद्धिः ।।
अर्थात- बुरे दिन आने पर बुद्धि विपरीत हो जाती है । 

३६- आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत् ।।
अर्थात- भोजन तथा व्यवहार में लज्जा नहीं करनी चाहिए । 

३७-  सत्यमेव जयते नाऽनृतम् ।।
अर्थात- सत्य की जीत होती है , झूठ की नहीं । 

३८- कः परः प्रियवादिनाम् ।।
अर्थात- प्रिय बोलनेवालों के लिए पराया कौन है ? 

३९- परोपकाराय सतां विभूतयः ।। 
अर्थात- सज्जनों का धन दूसरों की भलाई के लिए होता है ।

४०- विद्यारत्नं महाधनम् ।।
अर्थात- विद्यारूपी रत्न सबसे बड़ा धन है ।

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